Our Story
छोटी सी मुलाकात
प्रिया रात के 9:00 बजे स्टेशन पर अकेली बेंच पर बैठी थी। ऊपर से तेज बारिश हो रही थी—सावन का सुंदर
प्रिया रात के 9:00 बजे स्टेशन पर अकेली बेंच पर बैठी थी। ऊपर से तेज बारिश हो रही थी—सावन का सुंदर महीना था। लेकिन प्रिया उदास, निराश और परेशान थी क्योंकि उसे जॉब से निकाल दिया गया था। प्रिया मुंबई में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर थी, लेकिन कंपनी की नई पॉलिसी के चलते कुछ कर्मचारियों को निकाल दिया गया, जिसमें प्रिया भी शामिल थी।
प्रिया को कंपनी के दिए गए फ्लैट को भी खाली करना पड़ा और अब वह अपने घर नैनीताल लौट रही थी। लेकिन वह अकेली नहीं जा रही थी। उसके साथ उसके सारे सपने, उम्मीदें, आकांक्षाएं, और भरोसा भी जा रहा था।
प्रिया स्टेशन पर बैठी रो रही थी। इतने में ही अचानक, एक खूबसूरत नौजवान आकर उसके पास बेंच पर बैठ गया। उसने प्रिया की तरफ देखा और समझ गया कि वह किसी गहरी परेशानी में है। लेकिन प्रिया ने उसकी तरफ एक बार भी नहीं देखा। दोनों कुछ देर खामोश बैठे रहे। तेज हवाएं, सावन का सुंदर मौसम, और बिजली की कड़क—सब कुछ ऐसा लग रहा था जैसे कोई फिल्म का सीन हो। लेकिन यह तो हकीकत थी।
अब उस नौजवान ने बोलना शुरू किया।
"आंसू बहुत कीमती होते हैं, इन्हें ऐसे ही मत बहाइए," उसने कहा। और अपने शायराना अंदाज में बोलने लगा,
"तकलीफें तो आती-जाती हैं,
दर्द तो सबको होता है।
लेकिन अपने गम से वही बाहर आ सकता है,
जो अपना हौसला बुलंद रखे।"
फिर वह प्रिया के थोड़ा नजदीक आकर उसके कान में बोला, "मैडम, ये दुनिया और मैं दोनों इतने बुरे भी नहीं हैं, जितना आप हमें समझ रही हैं। आंखें खोलिए, दुनिया को भी देखिए और मुझे भी। शायद आपको आपकी समस्या का हल मिल जाए।"
प्रिया ने गुस्से में उस लड़के की तरफ तीखी नजरों से देखा। वह मुस्कुराने लगा और बोला, "चलो अच्छा है, आपने हमें देखने के लायक तो समझा।"
वो अजनबी था, पर जाने क्यों उसकी बातें और व्यक्तित्व प्रिया को अच्छा लगने लगा। हालांकि प्रिया ने उससे एक शब्द भी नहीं कहा, लेकिन दिल से वह उसकी ओर खिंच रही थी।
अब प्रिया की ट्रेन आने का समय हो गया। वह अपना सामान उठाने लगी। लड़के ने फिर कहा, "मैं नहीं जानता कि आप क्यों परेशान हैं, और मुझे नहीं लगता कि आप मुझसे बात करना चाहती हैं। लेकिन यह 'छोटी सी मुलाकात' मुझे जीवनभर याद रहेगी। बस मेरी एक बात याद रखना—आंसू मत बहाना, क्योंकि ये आंसू आपके खूबसूरत चेहरे पर अच्छे नहीं लगते।"
और जाते-जाते जोर से चिल्लाकर बोला, "मेरा नाम गौरव शर्मा है। कभी यह 'छोटी सी मुलाकात' याद आए, तो मेरा नाम जरूर याद करना।" इतना कहकर वह चला गया।
प्रिया गौरव को जाते हुए दूर तक देखती रही। वह सोच रही थी कि उसे रोक ले, पर गौरव तो जा चुका था। इतने में ही प्रिया की ट्रेन आ गई। प्रिया अपनी सीट पर बैठी और आईना निकालकर अपने बाल ठीक करने लगी। उसकी आंखों से फिर आंसू बहने लगे। उसने जल्दी से आंसू पोंछ लिए और गौरव की बात याद करके मुस्कुराने लगी।
ट्रेन के सफर के दौरान, वह गौरव की बातों और उसके शायराना अंदाज को याद करती रही। गौरव की बातों ने प्रिया को अलग तरह की ताकत दी। उसने निराशा छोड़कर उसी समय अपना लैपटॉप निकाला और नई जॉब की तलाश शुरू कर दी।
"एक नौकरी जाने से सब कुछ खत्म नहीं होता," उसने खुद से कहा।
जब प्रिया नैनीताल अपने घर पहुंची, तो उसे पता चला कि उसका रिश्ता तय हो गया है। अगले हफ्ते लड़का उसे देखने आ रहा है। प्रिया ने सोचा, "घरवाले जो करना चाहें करें। मैं तो नौकरी ढूंढती रहूंगी और जब लड़का मुझे देखने आएगा, तो मैं शादी के लिए मना कर दूंगी। इतनी जल्दी शादी नहीं करूंगी।"
घरवाले कहने लगे, "लड़के का अपना बिजनेस है, मुंबई में रहता है, अच्छा कमाता है और बहुत गुणी है। वह तुम्हारी तस्वीर देखकर रिश्ता जोड़ने को तैयार हुआ है।" प्रिया मन ही मन सोच रही थी, "मुझे किसी से रिश्ता नहीं जोड़ना।"
अगले हफ्ते घर के बाहर एक रेड कार आकर रुकी। पहले लड़के के माता-पिता उतरे और घर के अंदर आए। घर के सभी लोग उनका स्वागत सत्कार करने लगे। प्रिया पिंक साड़ी पहनकर चाय लेकर आई। लड़के की मां ने कहा, "प्रिया बेटा, तुम तो अपनी तस्वीर से भी ज्यादा खूबसूरत हो।"
इतने में एक दूसरी कार आकर रुकी। उसमें से ब्लू जींस और वाइट शर्ट में एक हैंडसम लड़का उतरा। वह घर के अंदर आया, सबके पैर छुए और फिर प्रिया के पास जाकर बैठ गया। उसने कहा, "आप आज भी मेरी तरफ नहीं देखेंगी? मुझसे बात भी नहीं करेंगी?"
प्रिया चौंक कर उसकी तरफ देखी और पाँच मिनट तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। यह वही गौरव शर्मा था।
फिर गौरव ने कहा, "मेरा नाम गौरव शर्मा है। मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ। क्या आप मुझसे शादी करेंगी?" उसने अपनी जेब से रुमाल निकालकर कहा, "यह रुमाल स्टेशन पर आपको देना चाहता था, आपके आंसू पोंछने के लिए। अब इसे ले लीजिए।"
प्रिया गौरव के गले लगकर रोने लगी। गौरव ने कहा, "ये आंसू आपके खूबसूरत चेहरे पर अच्छे नहीं लगते।" और रुमाल से प्रिया के आंसू पोंछ दिए।
प्रिया ने कहा, "मैं अब तक आपकी बातें नहीं भूली थी। मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि आप मुझे सच में मिल गए।"
गौरव ने कहा, "यह सब डेस्टिनी है। हमारी 'छोटी सी मुलाकात' ने मुझे हमेशा के लिए आपका बना दिया।"
उस दिन प्रिया और गौरव की कहानी पूरी हुई। यह 'छोटी सी मुलाकात' उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा बन गई।
संदेश:
कभी-कभी छोटी-छोटी मुलाकातें हमारी जिंदगी बदल देती हैं। अपनी डेस्टिनी पर भरोसा रखें, क्योंकि वही आपको सही वक्त पर सही इंसान से मिलाएगी।