A happy couple sharing a moment, smiling and gazing into each other's eyes with love and joy.

सातों रंगों की होली

इस कहानी से हमें रंगों का महत्व समझ में आता है कि जीवन में रंगों का होना कितना ज्यादा जरूरी है। जीवन में संघर्ष और दर्द तो होता ही है लेकिन हमें इससे डर कर या हार कर अपने जीवन को रंगहीन नहीं बनना चाहिए। सातो रंगों की होली इस कहानी को पढ़कर आपका भी जीवन रंगों से भर जाएगा। 

तो आओ चले  इस प्यारी सी कहानी की ओर।

राधा जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है प्रेम में विश्वास करने वाली धैर्यवान सुंदर कजरारे नैनों वाली चंचल हिरनी की तरह चहकने महकने वाली खुश रहने वाली प्यारी सी लड़की है और हां  राधा का तो राधे कृष्ण की भक्ति और उनके पवित्र प्रेम में अटूट विश्वास है या यह कह लो हमारी कि हमारी राधा कान्हा की प्रेम दीवानी है।

और राधा को रंगों से बहुत प्यार वह हमेशा रंग-बिरंगे कपड़े पहनती है और अपने आराध्य राधा कृष्ण का श्रृंगार भी सुंदर रंगों से करती है हमेशा सजी संवरी रहती है क्योंकि सांवरे कान्हा का प्रेम ही कुछ ऐसा है और मिठाई की बात हो तो राधा  सबसे अच्छा गुजिया बनाती है सबसे पहले अपने कान्हा को भोग लगाती है फिर सबको बांटती है और होली रंगोत्सव तो राधा को बहुत ही पसंद है वो तो हर साल होली का इंतजार करती की जल्दी से फाल्गुन शुरू हो जाए और वो इतने सारे रंगों की होली खेले ।

सबसे पहले राधा अपने कान्हा के साथ खूब सारी होली खेलती उसके बाद गली के बच्चों और सहेलियों के साथ सुबह से शाम तक भी होली खेलती तो भी उसका जी नहीं भरता ।
और कान्हा के लिए होली के प्रेम गीत भी गाती।
"मैं तो तेरी प्रेम दीवानी कान्हा। 
रंग ले मुझको अपने रंग में कान्हा। 
तेरे इंतजार में मैं हुई बावरी कान्हा। 
अब तो बजा दो अपनी मुरली कान्हा।"

राधा अपने माता-पिता की इकलौती संतान है।
राधा के पिताजी केशव भाई अग्रवाल का मिठाई का बिजनेस है और राधा अपने पिताजी के मिष्ठान भंडार में सभी कामों में सहयोग करती है। 

राधा का जीवन सुंदर प्रेम के सपने देखने और अपने मन में कृष्ण रूपी प्रियतम की छवि बसाए हुए व्यतित हो रहा था दिन और रात उसके हृदय मे कृष्ण की मुरली की धुन सुनाई देती थी ।
राधा हमेशा सोचती थी कि मेरे जीवन में भी राधे कृष्ण जैसा पवित्र प्रेम आ जाए। 

राधा के पिताजी ने राधा का विवाह अपने मित्र के बेटे से पहले से ही तय कर रखा था पर राधा को कुछ भी पता नहीं था अचानक से राधा से उसके पिताजी कहते हैं कि अब तुम्हारी शादी का समय नजदीक आ गया है मैंने सागर के साथ तुम्हारा रिश्ता तय कर दिया है और उसी के साथ तुम्हारी शादी होगी यह सब सुनकर तो राधा सन में रह गई। 
और राधा की मां ने भी उसको बहुत समझाया की सपनों की दुनिया से बाहर आओ तुम्हारे लिए कभी कृष्ण की मुरली नहीं बजेगी वह सिर्फ एक सपना है तुम सागर के साथ विवाह कर लो और खुश रहो। 

माता-पिता के दबाव में आकर राधा ने विवाह के लिए हां कह दिया पर राधा ने अपने सपनों को नहीं तोड़ा।

सगाई के दिन ही राधा के पिताजी के बिजनेस को बहुत बड़ा झटका लगता है  क्योंकि राधा के पिताजी का भरोसेमंद पार्टनर  दगा देकर उनका बहुत सारा रुपया लेकर भाग गया और  भी तरह से उस पार्टनर ने उन्हें बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह सब देखकर सुनकर सागर जिससे राधा का विवाह तय हुआ था शादी  के लिए मना कर देता है और और राधा से बहुत भला बुरा कहता है कि अब कोई तुमसे शादी नहीं करेगा तुम्हारी सारी जिंदगी बेरंग रहेगी अब तुम लोगों के पास कुछ नहीं बचा। राधा और उसका परिवार यह सब चुपचाप सुन रहा था सह रहा था ।  रोते हुए परेशान होते हुए एक महीना बीत गया राधा के पिताजी तो पूरी तरह से टूट चुके थे किसी को कोई हल समझ में नहीं आ रहा था। राधा भी चुपचाप अपने कमरे में गहरे सोच विचार में डूबी हुई थी।

इतने में ही अचानक से राधा के पास कृष्ण जी का मोर पंख उड़ कर आता है और राधा जैसे ही उसे अपने हाथों में लेती है राधा को एक सुकून का एहसास होता है। 
और राधा के मन में परिवर्तन होता है अब राधा एक कठोर गंभीर सोच वाली लड़की बन जाती है और उसके जीवन का एक ही लक्ष्य है अपने पिताजी के बिजनेस को फिर से खड़ा करना और अपने माता-पिता का खोया हुआ मान सम्मान फिर से दिलाना। 

राधा 25 साल की ग्रेजुएट पढ़ी-लिखी लड़की है वह लगातार कोशिश करती है की सब कुछ पहले जैसा हो जाए लेकिन काम बड़ा था और नुकसान ज्यादा हो गया था इसलिए राधा को सब कुछ मैनेज करने में काफी समय लग रहा था। 
लेकिन राधा ने अपनी चतुराई और समझदारी से अपनी गुजिया को प्रसिद्ध कर दिया क्योंकि राधा बहुत ही अच्छा गुजिया बनाती थी बिजनेस सिर्फ गुजिया की वजह से धीरे-धीरे सैट होने लगा।

माता-पिता भी बिजनेस की तरक्की को देखकर ठीक होने लगे थे लेकिन राधा की जिंदगी में कोई रंग नहीं था वो मेहनत  करती दिन रात  एक करके काम करती और  सिर्फ और सिर्फ अपने काम के बारे में सोचती ।

उसने तो होली खेलना भी छोड़ दिया था और रंगों से दूर रहने लगी और सिंपल सादे कपड़े पहनने लगी जब भी रंगोत्सव आता वह सिर्फ अपने कान्हा को रंग लगा लेती और खुद बेरंग रंग रह जाती ऐसे ही सालों बीत गए अब राधा पूरे तीस की हो चुकी थी और बिजनेस भी अच्छा चल रहा था। 

एक दिन अचानक फोन की घंटी बजती है और राधा को गुजिया का बहुत ही बड़ा ऑर्डर मिलता है क्योंकि राधा की गुजिया इतनी फेमस हो चुकी थी कि इसकी खुशबू बेंगलुरु तक चली गई।
जी हां दोस्तों यह  रंग गुलाल से भरी कहानी है जिसके रंग  उड़कर उत्तर प्रदेश से बेंगलुरु चले गए। 

एक स्वीट फूड ऑनलाइन कंपनी के मालिक  ने राधा को सीधा पार्टनरशिप ऑफर की क्योंकि उनके एक फ्रेंड ने उन्हें राधा की गुजिया को खिलाया था जिसका स्वाद और मिठास ऐसा था कि वह स्वीट फूड कंपनी का मालिक बेंगलुरु से उत्तर प्रदेश खींचा चला आया ।

 और सीधे राधा के घर जाकर डोर बेल बजाता है और जब राधा दरवाजा खोलती है तो बस ऐसी खो जाती है  क्योंकि जिस प्रियतम के जिस प्यार के उसने सपने देखे थे मानो वही प्यार उसके सामने खड़ा है ।
वह भी राधा को देखता ही रह जाता है लेकिन फिर भी कहता है मेरा नाम मुरली है मेरी स्वीट फूड ऑनलाइन डिलीवरी कंपनी है और मैं तुम्हारी इतनी स्वादिष्ट गुजिया को हर घर तक पहुंचाना चाहता हूं तुम्हें अपना पार्टनर बनाना चाहता हूं मेरे साथ बिजनेस करोगी राधा ने खुशी से इस बिजनेस प्रपोजल को एक्सेप्ट कर लिया इसका कारण सिर्फ उसके माता-पिता थे राधा अपने पापा के बिजनेस को बहुत ऊंचाई तक ले जाना चाहती थी। 

बिजनेस की बात तो हो गई और ऐसे ही मुरली को उत्तर प्रदेश में रहते हुए एक हफ्ता निकल गया वह रोज राधा से मिलने की बहाने ढूंढता राधा की गुजिया और राधा का स्वभाव राधा के कजरारे नैन मुरली के दिल में घर कर गए थे  मुरली राधा से सच्चा प्यार करने लगा था और राधा भी मुरली को दिल की गहराइयों से चाहने लगी थी लेकिन राधा जानबूझकर कठोर होने का दिखावा करती थी मुरली ने कई बार अपने मन की बात राधा से कहना चाहा पर राधा ने टाल दिया। अब तो मुरली सीधे राधा के माता-पिता के पास जाकर उनसे राधा का हाथ मांगता है और पूछता है इतनी सुंदर प्यारी लड़की के पास मुस्कान क्यों नहीं है वो मुस्कुराती क्यों नहीं है तो राधा की मां ने मुरली को सब कुछ बता दिया की राधा कैसे राधा की शादी टूटी उसके सपने टूटे और बिजनेस का घाटा। मुरली को सब कुछ समझ में आ गया। 

अगले दिन ही रंगोत्सव था होली का त्यौहार और राधा  मंदिर में कान्हा जी को रंग लगाकर आंख बंद करके कान्हा जी से प्रार्थना करने लगती है और जब आंख खोलती है तो उसके सामने मुरली खड़ा होता है और वो राधा से कहता है मैं भी राधा कृष्ण के पवित्र प्रेम में विश्वास करने वाला हूं तुम्हें देखते ही मेरे मन में प्रेम ऐसा गुलाल उड़ा जिसने मेरे जीवन को ही रंग दिया। 
और मुरली राधा का हाथ पकड़ कर कहता है मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं और  मैं अभी इसी वक्त तुमसे शादी  करना चाहता हूं। लेकिन राधा शादी के लिए मना कर देती है और रोते हुए मुरली से कहती है तुम्हें मुझसे अच्छी लड़की मिल जाएगी मेरी उदासी की छांव तुम पर नहीं पढ़नी चाहिए। और जाने लगती है इतने में ही मुरली ने कृष्ण जी के पास से सारा गुलाल लेकर राधा की मांग भर देता है और  ढेर सारा रंग उसके ऊपर डाल देता है। अब राधा के दिल में कृष्ण की बंसी बजने लगती है। 

राधा मुरली से कहती है मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं सच्चा प्यार करती हूं। अब मुरली और राधा एक दूसरे के प्यार में रंग गए दोनों के जीवन में ढेर सारा रंग आ गया। राधा के जीवन में फिर से प्रेम की होली आ गई और राधा पहले जैसी हो गई रंगों से प्यार करने वाली। 


कहानी का सार : किसी भी हादसे  की वजह से अपने जीवन से रंगों को दूर नहीं करना चाहिए और अपने सपनों को कभी नहीं भूलना चाहिए जैसे राधा के जीवन में कृष्ण की मुरली बजी और राधा के जीवन में सच्चा प्यार आया राधा की बेरंग ज़िंदगी में रंग आया ।

उसी तरह आपके जीवन में भी ढेर सारे रंग होंगे।

राधा और मुरली का प्यार राधे कृष्ण के जैसा पवित्र प्रेम है, और जैसा रंगोत्सव  मुरली और राधा के जीवन में आया वैसा रंग आपके जीवन में भी आ सकता है।