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गुप्त नवरात्रि और शक्ति पूजा
गुप्त नवरात्रि वर्ष में दो गुप्त नवरात्रि आती हैं। माघ मास की गुप्त नवरात्रि आषाढ़ मास की
वर्ष में दो गुप्त नवरात्रि आती हैं।
माघ मास की गुप्त नवरात्रि
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि
गुप्त नवरात्रि माँ आदिशक्ति की आराधना एवं ध्यान के लिए होती है।
“पूर्ण समर्पण ही गुप्त नवरात्रि का सच्चा अर्थ है।”
गुप्त नवरात्रि का अत्यधिक महत्व है क्योंकि इस नवरात्रि के द्वारा साधक आंतरिक चेतना एवं आत्मबल की शक्ति को जागृत कर सकते हैं। यह नवरात्रि अनेकों सिद्धियों को देने वाली होती है, विशेषतः शक्ति से परिपूर्ण सिद्धि, जिससे साधक अपने अंतर्मन में एक अलग तरह की अनुभूति महसूस करता है।
सिद्धियों का तात्पर्य केवल तंत्र विद्या से नहीं होता। मानसिक चेतना, आध्यात्मिक ज्ञान, दर्शन, वैराग्य, आत्मबोध, आत्मचिंतन और ध्यान, ये सारी क्रियाएँ सिद्धियाँ ही कहलाती हैं।
गुप्त नवरात्रि में “साधना” का विशेष महत्व है।
साधना का तात्पर्य वैराग्य से नहीं है। माँ आदिशक्ति को याद करना, उनका ध्यान करना, उनका स्मरण करना, उनकी पूजा करना और भक्ति करना, यह भी एक प्रकार की साधना है।
और किसी विशेष प्रयोजन हेतु किया गया जप, तप भी साधना कहलाता है।
शक्ति पूजा जीवन का आधार है। शक्ति के बिना जीवन संभव ही नहीं है। गुप्त नवरात्रि संसार को शक्ति की महिमा से अवगत कराने एवं शक्ति पूजा का अर्थ समझाने के लिए आती है।
माँ आदिशक्ति के अनेकों रूप हैं, जिनका वर्णन करना असंभव है।
शक्ति पूजा के द्वारा साधक कई तरह की बाधाओं एवं जीवन की समस्याओं से मुक्त हो जाता है।
गुप्त नवरात्रि मनोकामना पूर्ति का मार्ग है। दुनिया में हर व्यक्ति की अभिलाषा होती है। कुछ छिपी हुई मनोकामनाएँ होती हैं, लेकिन कई बरस बीतने के बाद भी वे पूर्ण नहीं होतीं। परंतु गुप्त नवरात्रि का समय चमत्कारिक होता है, जिससे साधक की मनोकामनाएँ माँ आदिशक्ति की कृपा से बहुत जल्द ही पूर्ण हो जाती हैं।
क्योंकि इस नवरात्रि में शक्ति पूजा का विशेष लाभ मिलता है।
क्योंकि यह नवरात्रि पूर्णतः ध्यान एवं साधना पर आधारित होती है।
झूठ नहीं बोलना, सत्य के मार्ग पर चलना, किसी का दिल नहीं दुखाना, परमार्थ करना, परोपकार करना, दान करना, अपना तथा दूसरों का अच्छा सोचना, निंदा नहीं करना, किसी के लिए अपशब्द नहीं बोलना, किसी का अपमान नहीं करना, यह सर्वश्रेष्ठ साधना है। माँ आदिशक्ति ऐसे साधकों से बहुत जल्दी ही प्रसन्न होती हैं।
गुप्त नवरात्रि स्वयं को जानने एवं अपने आत्मबल की शक्ति को जागृत करने का स्वर्णिम अवसर है।
“सही मायनों में गुप्त नवरात्रि साधक की आध्यात्मिक यात्रा है।”
गुप्त नवरात्रि में विशेषतः दस महाविद्या की साधना और उपासना की जाती है।
दस महाविद्या के द्वारा ही यह संपूर्ण ब्रह्मांड संचालित है, यह संसार संचालित है।
दस महाविद्या के ध्यान, स्मरण और उपासना से साधक जीवन चक्र एवं कालचक्र को समझने में सक्षम होता है।
उन्हें अद्भुत आत्मज्ञान की अनुभूति होती है।
काली
तारा
त्रिपुर सुंदरी
भुवनेश्वरी
भैरवी
छिन्नमस्ता
धूमावती
बगलामुखी
मातंगी
कमला
माँ काली सभी प्रकार के भय का नाश करने वाली हैं। माँ काली की आराधना से साधक भयमुक्त हो जाता है।
माँ तारा की आराधना से साधक को ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
माँ त्रिपुर सुंदरी सौंदर्य का प्रतीक हैं। माँ त्रिपुर सुंदरी की आराधना से साधक का जीवन भी सुंदर एवं पवित्र हो जाता है।
माँ भुवनेश्वरी की उपासना साधकों को अखंड शक्ति एवं ब्रह्मांडीय ऊर्जा प्रदान करती है।
माँ भैरवी अपने भक्तों को अभय होने का वरदान देती हैं। माँ भैरवी की उपासना से साधक निर्भीक जीवन व्यतीत करता है।
माँ छिन्नमस्ता की आराधना से दुखों का नाश होता है। सभी प्रकार की बाधाएँ दूर हो जाती हैं।
माँ धूमावती की आराधना से साधक अखंड ज्ञान प्राप्त करता है और वैराग्य प्राप्त करता है।
माँ बगलामुखी की उपासना से शत्रु बाधा दूर होती है और जीवन सरल एवं सुंदर हो जाता है।
माँ मातंगी संगीत एवं मधुरता की अधिष्ठात्री देवी हैं। माँ मातंगी की आराधना से साधक का जीवन मधुर एवं सुंदर हो जाता है। जीवन में प्रेम और खुशियों का आगमन होता है।
माँ कमला समृद्धि का प्रतीक हैं। माँ कमला की आराधना से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है, धन, संपत्ति, वैभव, मान-सम्मान, पद और प्रतिष्ठा।
दस महाविद्याएँ महाशक्ति स्वरूप हैं।
गुप्त नवरात्रि बाह्य जगत का उत्सव नहीं है।
गुप्त नवरात्रि आंतरिक जगत का उत्सव है।
गुप्त नवरात्रि साधकों के लिए आंतरिक शुद्धि, आंतरिक चेतना, आत्मबोध और एक संकल्पित जीवन यात्रा का उत्सव है।
गुप्त नवरात्रि को केवल तंत्र क्रिया से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
सामान्य साधक, जो तांत्रिक विद्या से परे हैं, उनके लिए भी गुप्त नवरात्रि मनोकामना सिद्धि और विचारों की शुद्धि प्राप्त करने का मार्ग है।
सामान्य साधक भी माँ भगवती आदिशक्ति के ध्यान, भक्ति और स्मरण से आदिशक्ति महाशक्ति की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।
अपने हृदय में भक्ति का दीपक जलाकर देखिए और एक बालक की भाँति माँ आदिशक्ति को पुकार कर देखिए। महाशक्ति के साथ अपना रिश्ता जोड़कर देखिए। आपका परिचय सत्यता से अपने आप हो जाएगा।
गुप्त नवरात्रि एक आध्यात्मिक तपस्या है।
गुप्त नवरात्रि का यही सार है कि केवल तंत्र के लिए या वैरागियों के लिए गुप्त नवरात्रि नहीं होती। सामान्य साधक भी गुप्त नवरात्रि में माँ की आराधना एवं उपासना कर सकता है।
गुप्त नवरात्रि का सच्चा अर्थ स्वयं को जानना एवं माँ की शक्ति को अपने अंदर महसूस करना और महाशक्ति के साथ अपना रिश्ता जोड़ना है।
गुप्त नवरात्रि महाशक्ति की दिव्य पूजा है, जिससे भक्तों के जीवन में दिव्य प्रकाश आता है।