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सलोनी का सपना: सावन का झूला
सलोनी छोटी-छोटी खुशियों में खुश हो जाया करती थी। उसे अपने गाँव से, पेड़-पौधों, हरियाली, नदियों और
सलोनी छोटी-छोटी खुशियों में खुश हो जाया करती थी। उसे अपने गाँव से, पेड़-पौधों, हरियाली, नदियों और खेतों से बहुत प्यार था और खासकर सावन का झूला। वह हर साल बेसब्री से झूले का इंतजार करती थी कि कब सावन आए। यह हरियाली, यह मौसम, हँसना, खेलना, कूदना, नाचना, गाना, यह सब उसे बहुत अच्छा लगता था। सहेलियों के साथ हँसी-ठिठोली, यह तो सलोनी के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
सावन के झूले को लेकर सलोनी का एक गहरा सपना भी है।
सलोनी ने गाँव में रहकर ही 12वीं तक की पढ़ाई पूरी कर ली। आगे की कॉलेज की पढ़ाई के लिए सलोनी को अपना गाँव छोड़कर अपने भाई के घर शहर आना पड़ा, बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में।
बेंगलुरु में रहते सलोनी को 3 साल बीत गए। Graduation का आखिरी दिन था। सलोनी पढ़ाई में बहुत अच्छी थी। वह University Topper बनी।
एक तरफ सलोनी के लिए इतनी सारी तालियाँ बज रही थीं। उसके दोस्त और परिवार सब बहुत खुश थे।
लेकिन सलोनी उनके साथ नहीं थी।
सलोनी College Campus के Garden में पेड़-पौधे, हरियाली और झूले, इन सबको भीगी आँखों से निहार रही थी। सलोनी अपने आप में खोई हुई थी। उसे पता नहीं था कि उसके साथ कौन खड़ा है।
वह University के Dean का बेटा रोहित था। America का बहुत बड़ा businessman, वह कुछ दिनों के लिए अपनी family के पास आया हुआ था।
सलोनी की सादगी, उसकी आँखों की सच्चाई और उसकी मासूमियत देखकर उसी समय decide कर लेता है, अगर शादी करनी है तो इसी लड़की से करनी है, नहीं तो नहीं करनी है।
इतना खूबसूरत वातावरण और सामने प्यारी-सी सलोनी जैसी लड़की। तेज हवाओं और बारिश के बीच दोनों की नजरें मिलीं। 5 मिनट तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। मानो बिना कुछ कहे ही एक-दूसरे को अपना मान लिया हो।
रोहित कुछ कह पाता, उससे पहले ही सलोनी वहाँ से चली जाती है।
रोहित इतना बेचैन हो जाता है कि अगले दिन रिश्ता लेकर अपने माता-पिता के साथ सलोनी के घर पहुँच जाता है।
घर वाले तो झट से तैयार हो जाते हैं, लेकिन रोहित को तो सिर्फ सलोनी की आँखों में छुपा सपना दिखाई दे जाता है और सबके सामने ही रोहित सलोनी से कहता है,
“अगर तुम मुझे अपने लायक समझो, तो मेरा प्यार स्वीकार कर लो।”
सलोनी और रोहित को अकेला छोड़कर परिवार वाले दूसरे कमरे में चले जाते हैं।
सलोनी कहती है, “आप इतने अच्छे इंसान हैं। मैंने सुना है, पर मैंने देखा भी है। Social Media पर आपकी profile देखी है। आप लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। आप इतने rich हैं, फिर मुझ जैसी साधारण लड़की से शादी क्यों करना चाहते हैं?”
रोहित मुस्कुराकर कहता है, “Madam, तुम जैसी topper और सादगी से जीवन जीने वाली लड़की अपने आप को साधारण बोले, ये लाइन कुछ अच्छी नहीं लगती।”
सलोनी भी मुस्कुरा देती है।
बस, क्या था? यही तो एक मजबूत रिश्ते की डोर होती है।
रोहित कहता है, “मैं कल सुबह तुम्हें लेने आऊँगा। तुम तैयार रहना, मुझे तुम्हें कहीं लेकर जाना है।”
अगले दिन रोहित सलोनी को लेने आता है। सलोनी पूछती रहती है, “हम कहाँ जा रहे हैं?”
रोहित कहता है, “आप चलिए तो सही।”
जैसे-जैसे रास्ता आगे बढ़ता जाता है, सलोनी शांत होती जाती है। एक तरफ तो खुशी, दूसरी तरफ आँसू झलक में।
जैसे ही सलोनी कार से नीचे उतरती है, उसकी खुशी का तो ठिकाना ही नहीं था। मानो दुनिया की सबसे बड़ी खुशी उसे मिल गई हो। उसका सबसे बड़ा सपना पूरा हो गया हो।
और सामने क्या देखती है, इतना खूबसूरत सावन का झूला।
रोहित प्यार से सलोनी को सावन के झूले में बिठाकर झुलाने लगता है।
इतनी सुंदर सजावट, वह हरियाली, सुंदर पेड़-पौधे, खेत-खलिहान, नदियाँ, झरने और प्रकृति का खूबसूरत वातावरण और रोहित-सलोनी का सुंदर रिश्ता, मानो प्रकृति ने ही दोनों को एक-दूसरे के लिए बनाया हो।
सलोनी रोहित की तरफ आश्चर्य से देखने लगती है।
रोहित कहते हैं, “Madam, जब आप पार्क में झूला और पेड़-पौधे, वह सब निहार रही थीं, तब मैंने आपको देख लिया था और आपकी आँखों में छुपे सपने को भी जान लिया था।”
सलोनी सालों बाद खिलखिलाकर हँसती है।
सलोनी का सपना: सावन का झूला।
वह चाहती थी कि उसका जीवनसाथी, उसका अपना प्यार, उसके लिए झूला बनाए।
ऐसा ही हुआ।
जो खुशी हमें प्रकृति से मिलती है, वह किसी और चीज़ से नहीं मिल सकती। दिखावटी खुशियों को छोड़कर सलोनी की तरह अपनी जिंदगी की सच्ची खुशियों को पहचानिए।
जीवन की सच्ची खुशी हमेशा बड़ी चीज़ों में नहीं, बल्कि उन छोटी-छोटी खुशियों में छिपी होती है, जो हमारे दिल के बहुत करीब होती हैं। हमें अपने सपनों और अपनी सच्ची खुशियों को पहचानना चाहिए और उन्हें संजोकर रखना चाहिए। सच्चा रिश्ता वही है, जहाँ बिना कहे भी कोई हमारी आँखों में छुपे सपनों को समझ सके और उन्हें पूरा करने की कोशिश करे।