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समीर और सानिया का अनचाहा रिश्ता
प्यार का रिश्ता, शादी का रिश्ता, विश्वास का रिश्ता कभी भी अनचाहा या दबाव का नहीं होता। यह तो
प्यार का रिश्ता, शादी का रिश्ता, विश्वास का रिश्ता कभी भी अनचाहा या दबाव का नहीं होता। यह तो समर्पण का सच्चा रिश्ता होता है।
यह अनचाहा रिश्ता रिश्तों में दबाव के कारण बनता है। यदि आपका साथी आपको ना पसंद कर रहा है, avoid कर रहा है और बहुत सारे issues हैं आपके बीच में, लेकिन आप फिर भी उसके साथ रहना चाहते हैं, तो यह अलग बात है कि आप अपना रिश्ता बचाना चाह रहे हैं।
लेकिन दूसरी तरफ आपका partner आपके साथ खुश नहीं है, कोई रिश्ते में लगातार दबाव महसूस कर रहा है और आप पूरी तरह से समझ रहे हैं कि वह क्या चाहता है, पर फिर भी आप लगातार उसे pressurise किए जा रहे हैं, अपने हिसाब से चलाने की कोशिश कर रहे हैं, उसका mind, उसकी life control कर रहे हैं और उससे बहुत ज्यादा expectation रख रहे हैं, वह भी जबरदस्ती, तो यह बिल्कुल गलत है।
ऐसे रिश्ते कभी नहीं बनते, बल्कि जिंदगी भर के लिए उलझ जाते हैं।
ऐसे ही एक रिश्ते की कहानी लेकर आई हूँ।
समीर और सानिया का अनचाहा रिश्ता।
तो आइए सबसे पहले मिलते हैं समीर से।
समीर बहुत ही young 24 साल का एक युवा businessman है, जो auto dealer है, second-hand four-wheeler cars sale करता है, जिसकी बहुत अच्छी income है।
पूजा-पाठ, व्रत-उपवास, माँ दुर्गा को मानने वाला और बहुत ही खुशमिजाज, सुंदर लड़का है, जो सबको सम्मान देता है, बहुत मिलनसार है।
तो यह था समीर का परिचय।
अब मिलते हैं सानिया से, जो एक बहुत ही अमीर, बहुत ही बड़े घराने की बेटी है।
उसके पिताजी का बहुत बड़ा कारोबार है।
समीर से कई गुना अमीर है और महाघमंडी, नकचढ़ी, चिड़चिड़ी, गुस्से वाली। उसे लगता था कि पूरी दुनिया उसके हिसाब से चले। अपने पैसों का बहुत अहंकार, लेकिन दिखने में, रंग-रूप में समीर के मुकाबले में बहुत average थी।
Talent में भी, व्यवहार में भी।
उसका समीर के साथ match नहीं था।
लेकिन दोनों college में साथ थे और यूँ ही दोस्ती और फिर यह रिश्ता प्यार में बदल गया।
वह भी यह किस तरह का प्यार था, आपको सुनकर बहुत हैरानी होगी।
जबरदस्ती वाला।
समीर को तो अंदाजा भी नहीं था कि उसने जलते कोयले में हाथ डाल दिया है।
समीर मस्त, खुश रहने वाला लड़का। सानिया को तो पहले से ही पसंद था। उसे पहले से ही चाहने लगी थी। यहाँ propose सानिया ने समीर को किया और समीर ने बिना कुछ सोचे-समझे हाँ बोल दिया, जबकि वह सानिया के nature से, स्वभाव से भली-भाँति परिचित था।
फिर भी समीर को लगा दोस्ती है, हमउम्र हैं, यही प्यार होगा।
समीर को तो यह भी पता नहीं चल रहा था कि उसे उसके साथ अच्छा लगता है या नहीं। वह तो सानिया को पहले अपने घर ले गया, अपनी माँ से, बहन से, परिवार से मिलवाया। उसे इतनी खुशी और इतना सम्मान दिया, जो बहुत कम लोगों के नसीब में होता है।
एक साल के relation के बाद 25 साल की age में समीर ने बिना सोचे-समझे सानिया से शादी कर ली।
वह भी, समीर इतनी जल्दी शादी नहीं करना चाहता था। सानिया के कहने पर ही उसने अपने जीवन का इतना बड़ा फैसला ले लिया।
सानिया के घर वाले शादी के खिलाफ थे, क्योंकि वह और अमीर घराने में अपनी बेटी की शादी करवाना चाहते थे और समीर का मिलनसार nature उन्हें अच्छा नहीं लगता था।
इसलिए सानिया और समीर ने court marriage कर ली।
लेकिन सानिया के घर वालों ने यह रिश्ता accept नहीं किया और समीर का परिवार तो सानिया के लिए आँखें बिछाए बैठा था।
समीर ने बहुत धूमधाम से, मान-सम्मान से, रीति-रिवाज के साथ पूरे समाज के सामने सानिया से विवाह किया।
शुरुआती दौर में ही सानिया समीर पर अक्सर हर काम के लिए दबाव बनाया करती। उसकी एक भी बात नहीं सुनती, अपना ही हुक्म चलाती। यहाँ तक समीर को क्या खाना है, वह उसको भी avoid करती। वह अपनी पसंद की ही चीजें बनाती।
पूरी तरह से समीर और समीर की life को control कर रही थी।
उसके परिवार के साथ भी उसने यही किया।
समीर भी इस रिश्ते में रहना चाहता था। वह समाज, परिवार को बहुत मानता था, रिश्तों की अहमियत जानता था। इसलिए सोचता था, इसका स्वभाव भी ऐसा ही है, मैं ही समझौता कर लेता हूँ।
शादी के एक साल बाद समीर और सानिया के घर में बेटा पैदा हुआ।
समीर तो बहुत ही खुश था और सानिया के परिवार वालों ने भी यह रिश्ता accept कर लिया।
लेकिन सानिया के परिवार का और सानिया का दबाव समीर पर बना रहता।
समीर तो एक mother की तरह अपने बच्चे की सेवा करता, घर-गृहस्थी संभालता और अपना business भी।
समीर के कुछ खास दोस्त थे, बहुत पुराना रिश्ता था। समीर अक्सर उनसे मिलने जाया करता था।
सानिया को बिल्कुल पसंद नहीं था।
वह घड़ी देखकर समीर को भेजती, आधे घंटे में घर वापस आना, एक घंटे में वापस आना।
पैसे का हिसाब भी समीर से बहुत करती। उसे गिनकर पैसे देती थी। इतना खर्च करना, इतना नहीं।
ऐसे ही 2 साल गुजर गए।
अब यह रिश्ता समीर के लिए बोझ बन चुका था।
सानिया समीर को उसकी life में कोई space नहीं दे रही थी, न ही देना चाहती थी।
हर बात पर रोक, तो हर बात पर control।
अब तो दोनों का ऐसा झगड़ा हुआ, जिसकी गूँज पूरे परिवार, समाज सभी जगह फैल गई।
यहाँ तक कि समीर ने सानिया को जाने के लिए भी कह दिया।
सानिया ने कहा, मैं क्यों जाऊँ?
मैं तुमसे शादी करके आई हूँ। यह घर मेरा है। तुम निकलो मेरे घर से।
ऐसे करके समीर को ही रोज भगाने लगी।
समीर सोचता है, बहन, माँ, परिवार है, क्या करूँ?
घर का पूरा वातावरण खराब हो चुका था।
इसी बीच समीर का business भी धीरे-धीरे down होता चला गया।
पैसों की कमी।
और इतनी सारी problem सानिया मैडम ने अपने परिवार वालों से पैसे लेना शुरू कर दिया और एहसान जताना शुरू कर दिया।
अपने घर की बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ मंगवाती, उसमें घूमती, वहाँ से खाना मंगवाती।
समीर को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ती।
यही था रिश्तों का दबाव।
समीर घुट रहा था इस रिश्ते में।
अब समीर पहले जैसा समीर नहीं रहा।
एक ऐसी बुरी आदत लगी, जिसने उसे बर्बाद करके रख दिया।
समीर पूरी तरह से शराबी हो चुका था, क्योंकि सानिया की कड़वी बातें और सानिया की शक्ल देखना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था, इसलिए उसने शराब पीना शुरू कर दिया।
रोज रात को शराब पीकर आता।
फिर ऐसा time आया कि वह दिन-रात नशे में डूब गया।
और सानिया बेचारी बनकर हर जगह कहती, फिरती, बच्चे की देखभाल, बच्चे का school, घर चलाना, परिवार चलाना, यह सारी जिम्मेदारी मुझे उठानी पड़ती है, क्योंकि मेरा पति तो निकम्मा है, शराबी है।
सानिया बाहर job करती, समीर घर पर बैठकर दारू पीता।
अब तो समीर को किसी की भी परवाह नहीं थी। कोई उसे कुछ भी बोले।
जरा सोचिए, एक अच्छा-खासा नौजवान, जो हर तरह से योग्य और काबिल था, जो सच में जिंदगी को बहुत अच्छी तरह से जीने का हकदार था, उसके साथ क्या हो गया?
कारण था रिश्ते का दबाव और एक गलत रिश्ते को चुनना, क्योंकि यह तो प्यार था ही नहीं।
समीर ने धोखे को प्यार समझ लिया। यही उसकी सबसे बड़ी गलती थी।
एक रिश्ते में सबसे ज्यादा जरूरी जो होता है, अपने partner को space देना।
हर व्यक्ति की अपनी पसंद-नापसंद है।
अपना एक जीने का style होता है।
बहुत सारी आकांक्षाएँ, महत्त्वाकांक्षाएँ होती हैं, तो अपने साथी को एक space देना चाहिए, जिसमें उसकी खुशी है।
अगर कोई गलत कर रहा है तो बात अलग है, लेकिन एक personal space का अधिकार सबको है।
यदि space की आड़ में कोई बहुत बड़ी गलती कर रहा है, तो आप रोके-टोके।
लेकिन जबरदस्ती का दबाव, रोक-टोक, रिश्ते को control करना, यह सब सही नहीं है।
इससे कोई भी रिश्ता दूर तक चल पाना तो दूर, वहीं दम तोड़ देता है।
भले आप साथ रहे हैं, लेकिन वह रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
तो यह था सानिया और समीर का दबाव का रिश्ता।
रिश्ता प्यार का हो या शादी का, उसमें अधिकार से ज्यादा सम्मान और दबाव से ज्यादा समझदारी जरूरी है।
याद रखिए, सच्चा रिश्ता वह नहीं जिसमें कोई एक व्यक्ति दूसरे को अपने हिसाब से चलाए, बल्कि वह है जिसमें दोनों एक-दूसरे को समझें, सम्मान दें और अपनी इच्छा से साथ चलें।
आज के दौर में रिश्तों में अलगाव, तनाव और depression लगातार बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में रिश्तों को एक मजबूत आधार देने के लिए मेरा यह एक छोटा-सा प्रयास है।
मैं अपनी कहानियों के माध्यम से टूटे हुए रिश्तों और टूटे हुए दिलों को जोड़ना चाहती हूँ।
मेरा विश्वास है कि सही समझ, आपसी सम्मान, विश्वास और संवाद से रिश्तों को एक नई दिशा दी जा सकती है।
मेरी कहानियाँ केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि रिश्तों को समझने, महसूस करने और उन्हें बेहतर बनाने की एक छोटी-सी कोशिश हैं।