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युवा शक्ति: स्वयं को कमजोर समझना सबसे बड़ी भूल
दुनिया कहती रहे कि आपने कुछ नहीं किया, आपको कुछ नहीं आता, आप तो हार गए। इससे आपकी जिंदगी में कोई
दुनिया कहती रहे कि आपने कुछ नहीं किया, आपको कुछ नहीं आता, आप तो हार गए। इससे आपकी जिंदगी में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
लेकिन आपने स्वयं को हारा हुआ समझ लिया, तो जिंदगी को संभालना बहुत ज्यादा कठिन हो जाएगा।
परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, संघर्ष चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, जिंदगी के उतार-चढ़ाव से डरो मत, घबराओ मत। अपने अंदर की शक्ति को महसूस करो और आगे बढ़ने का प्रयास लगातार करते रहो।
दुनिया आपको कमजोर समझे, तो इससे कुछ नहीं बिगड़ेगा। लेकिन यदि आपने स्वयं को कमजोर समझ लिया, तो आपकी हार निश्चित है।
जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं, जब लोगों की बातें और उनके विचार हमारे मन को प्रभावित करने लगते हैं। कभी-कभी हम दूसरों की बातों को इतना महत्व देने लगते हैं कि अपनी योग्यता और काबिलियत पर ही संदेह करने लगते हैं।
लेकिन दूसरों के सोचने से आपकी योग्यता कम नहीं हो जाती। किसी के कमजोर समझने से आप कमजोर नहीं हो जाते। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप स्वयं को किस दृष्टि से देखते हैं और अपनी शक्ति पर कितना विश्वास रखते हैं।
आज के दौर में युवाओं की सबसे बड़ी समस्या मन की दुर्बलता और मानसिक रूप से स्वयं को कमजोर समझ लेना है, जिसके पीछे उनकी योग्यता और काबिलियत छिप जाती है।
जब कोई युवा स्वयं को कमजोर समझने लगता है, तो कई बार उसकी वास्तविक क्षमताएँ सामने नहीं आ पातीं। वह अपनी शक्ति को पहचान नहीं पाता और दूसरों की सोच को ही अपनी पहचान मानने लगता है।
इसलिए प्रत्येक युवा को अपने अंदर की शक्ति को पहचानना चाहिए। अपनी मानसिक शक्ति और आंतरिक शक्ति को पहचानकर युवा शक्ति का परिचय देना चाहिए।
देश का हर युवा योग्य है, काबिल है और शक्तिशाली है। जरूरत है उसे अपनी शक्ति का एहसास करने और स्वयं पर विश्वास रखने की।
युवाओं से मेरा विशेष आग्रह है कि जिंदगी में कभी भी, किसी भी परिस्थिति में टूटना नहीं, बिखरना नहीं। अपने मन और आत्मा से कभी कमजोर मत पड़ना और एक शक्तिशाली युवा शक्ति बनकर उभरना।
जीवन में संघर्ष आते हैं, परिस्थितियाँ बदलती हैं और कई बार हमें ऐसे दौर से गुजरना पड़ता है, जब मन निराश होने लगता है। लेकिन किसी भी परिस्थिति को अपनी मानसिक शक्ति पर हावी मत होने दीजिए।
अपने अंदर की शक्ति को पहचानिए, मानसिक रूप से दृढ़ रहिए और स्वयं को कमजोर समझने की मानसिकता से बाहर निकलकर आगे बढ़ते रहिए।
स्वामी विवेकानंद जी ने भी कहा है:
“स्वयं को कमजोर समझना दुनिया का सबसे बड़ा पाप है।”
यह विचार हमें अपनी शक्ति पहचानने और स्वयं पर विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है। जब हम स्वयं को कमजोर समझने लगते हैं, तो परिस्थितियों का सामना करने का साहस भी कम होने लगता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी मानसिक शक्ति को पहचानें और कठिन परिस्थितियों में भी स्वयं को कमजोर न पड़ने दें।
दुनिया आपको क्या समझती है, इससे अधिक जरूरी यह है कि आप स्वयं को क्या समझते हैं। दूसरों की नकारात्मक सोच को अपनी कमजोरी मत बनने दीजिए। अपनी योग्यता और काबिलियत को पहचानिए, अपने मन और आत्मा को कमजोर मत पड़ने दीजिए।
याद रखिए, देश का प्रत्येक युवा योग्य है, काबिल है और शक्तिशाली है। जरूरत केवल अपनी शक्ति को पहचानने और स्वयं पर विश्वास रखने की है।
Laxmi Bagh (Pinky)
Thinker | Author | Entrepreneur